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उम्मीद

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सूरज कि पहली किरने, गीत सुनाती है तेरे ! पूरब से बहती लाली,बस रंग दिखाती है तेरे ! वायु की पहली सांसो में होती है तेरी छुअन ! पंछी तक पहले कलरव में नगमे गाते हें तेरे !
( Lake side IITb)
फूलों की पहली धडकन में, खुशबू बहती हें तेरी ! शबनम की ढलती बूंदों में, कुछ बातें रहती है तेरी ! नीले रंग पटल पर कोई, रंगता हें तेरे चेहरे !    ईश्वर की हर इक रचना में, सूरत होती हें तेरी !! ( Lake side IITb) पर ख्वाब बिखरते भोर सुबह, जब दुनिया होती अँधेरी ! लम्हों की हर टिक-टिक में, टिक-टिक करती यादें तेरी ! खोलूं नयन या बंद रखूं, कुछ फर्क नहीं लगता मुझको, ऐसे भी तू ही दिखती हें, वैसे भी तस्वीरें तेरी  !!
ये दुनिया तुम्हें सुनाती है, ये दुनिया तुम्हें दिखाती है !    क्या ये तेरी एक बेशर्मी है, या मेरी ही नादानी है !
उम्मीद पिटारी में बैठी, फिर भी कुछ ख्वाब बनाती है ! आँखें में खोलूं एक दिन और सच में तुझको पा जाऊं ! या आंखे बंद करूँ इक दिन और ख़्वाबों में ही खो जाऊं ! या आंखे बंद करूँ इक दिन और ख़्वाबों में ही खो जाऊं ! उम्मीद पिटारी में बैठी, फिर भी कुछ ख्वाब बनाती है ! उम्मीद पिटारी में बैठी, फिर भी कुछ…