ये iit की जिंदगी, सोने का यहाँ नही ठिकाना। आज freshizza कल परीक्षा, हे ईश्वर तू मुझे बचाना।। सबसे पहले हम कोटा जाए, bansal में funde चमकाए, दो साल तक वाट लगाकर, iit फोडू कहलाये। खेलो का कुछ नाम नही था, दिनभर काम आराम नही था, यहाँ आकर फिर किस्मत फूटी, वो ही किस्सा वही फ़साना। हे ईश्वर तू मुझे बचाना॥ हॉस्टल के कमरे हे इसे, चिडियाघर के पिंजरे जैसे, बाथरूम में लाइन लगाओ, देर करो तो लाते खाओ। खाने के बारे में क्या बोले, बेहतर हे हम मुह न खोले, मटर पनीर की सब्जी में तुम, पनीर ढूंढ़ कर मुझे बताना। हे ईश्वर तू मुझे बचाना॥ सात बजे की alarm जगाए। जिसे बंद कर के सो जाए, प्यारे प्यारे सपने बोले, थोड़ा सा तो और तू सोले। lecture में तो टाइम हे भोले, खा ले तू नींदों के झूले, सवा आठ जब नींद खुले तो, उठकर भागम - दौड़ मचाना। हे ईश्वर तू मुझे बचाना॥ भागते हुए क्लास में जाओ, वहा जा कर के फिर सो जाओ, coffee shack से maggie लाकर, कक्षा में उसे मजे से खाओ। professor जाने क्या पदाए, हम तो बस नज़रे दौड़ाए, पूछे मित्र से मार के कोहनी, उस लड़की का नाम बताना, हे ईश्वर ...
बहुत ही खूब...एक-एक पंक्तियाँ उनके गजल-सफर को बयां करती हुई |
ReplyDeleteमेरा ब्लॉग आपके इंतजार में,समय मिलें तो बस एक झलक-"मन के कोने से..."
आभार...|
गया नहीं वो दूर दिल से
ReplyDeleteबस नज़र से दूर है
ज़िन्दगी के अंधेरों में
वो नूर बन के आता रहा ...
एक ग़ज़ल इसी ख्याल के नाम
http://www.youtube.com/watch?v=iAW-IBzFbsE
@Sunil Sir ...
ReplyDeletemeri bhi pasandeeda hai :)