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Monday, November 2, 2009

IIT की जिंदगी ::..एक freshie की कहानी


ये iit की जिंदगी,
सोने का यहाँ नही ठिकाना।
आज freshizza कल परीक्षा,
हे ईश्वर तू मुझे बचाना।।


सबसे पहले हम कोटा जाए,
bansal में funde चमकाए,
दो साल तक वाट लगाकर,
iit फोडू कहलाये।
खेलो का कुछ नाम नही था,
दिनभर काम आराम नही था,
यहाँ आकर फिर किस्मत फूटी,
वो ही किस्सा वही फ़साना।
हे ईश्वर तू मुझे बचाना॥


हॉस्टल के कमरे हे इसे,
चिडियाघर के पिंजरे जैसे,
बाथरूम में लाइन लगाओ,
देर करो तो लाते खाओ।
खाने के बारे में क्या बोले,
बेहतर हे हम मुह न खोले,
मटर पनीर की सब्जी में तुम,
पनीर ढूंढ़ कर मुझे बताना।
हे ईश्वर तू मुझे बचाना॥


सात बजे की alarm जगाए।
जिसे बंद कर के सो जाए,
प्यारे प्यारे सपने बोले,
थोड़ा सा तो और तू सोले।
lecture में तो टाइम हे भोले,
खा ले तू नींदों के झूले,
सवा आठ जब नींद खुले तो,
उठकर भागम - दौड़ मचाना।
हे ईश्वर तू मुझे बचाना॥


भागते हुए क्लास में जाओ,
वहा जा कर के फिर सो जाओ,
coffee shack से maggie लाकर,
कक्षा में उसे मजे से खाओ।
professor जाने क्या पदाए,
हम तो बस नज़रे दौड़ाए,
पूछे मित्र से मार के कोहनी,
उस लड़की का नाम बताना,
हे ईश्वर तू मुझे बचाना॥

epsilon,delta हमे सताए,
उपर से dumbo तडपाये,
कभी cult के कभी tech के,
हर orientation में हाजिरी लगवाये
गप्पो में कई राते विताई,
कभी quizzes ने नींद उडाई,
अब जब सोने का टाइम मिला था,
तभी था freshizza को आना1
हे ईश्वर तू मुझे बचाना॥

दिल को भी एक मलाल बहुत हे,
लड़कियों का अकाल बहुत हे,
अर्थशास्त्र की भाषा में कहे तो,
supply कम demand बहुत हे!
यहाँ आने का यही सिला हे,
इसी जिंदगी का श्राप मिला हे,
चार साल के लिए बेहतर हे,
लड़को का हनुमान भक्त बन जाना!
हे ईश्वर तू मुझे बचाना॥








to be continued.....
ऋषभ जैन



6 comments:

  1. This is the poem i wrote in freshizza one of the biggest cultural event for first year students in IIT Bombay.this entry got first prize in Hindi poetry event

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  2. भाई इतने थोक के भाव इतने आईआईटी खुल गए हैं इतनी सीटें बढ़ गई हैं की क्या बताएं. आजकल आईआईटीयन तक की पिंक स्लिप कट रही है, बीस साल पहले एक इज्ज़त होती थी.

    और आईआईटी में नाम पूछने लायक चेहरे वाली भी कोई लड़की होती है क्या? कभी सुनने में तो नहीं आया.

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  3. Bravo! this deserves first prize of course! i havent read any better poem writeen in so simple words..and its every line animates the iit life so truely. congrats!

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