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Saturday, September 11, 2010

एक छुपी कहानी


हर बिना धुले कपडे की एक कहानी होती हें !
सिमटी हुई सी,
कभी आस्तीन कभी जेब कभी महक में छुपी !
झांकते है कुछ लम्हे कुछ यादे,
उन सिलवटो और निशानों से !
और सुनाते हें एक कहानी उस सफर की,
जो उसके धुलने के साथ ही  भुला दिया जाएगा !
हर बिना धुले कपडे की एक कहानी होती हें !!
.
.
राजू का मिटटी से सना स्कूल का नीला शर्ट
बता रहा हें कि आज उसने खेला है फुटबाल
क्लास छोड़ कर !
कुछ भीगी सी आस्तीने गवाह हें
कि पसीना फिर उसने बाज़ुओ से ही पौछा है !
.
पड़ोस कि आंटी की
लखनवी डिजाईनर साड़ी पर लगे सब्जी के निशान
बता रहे है भोज में आये मेहमानों कि भूख को !
रोज़ मोहल्ले का डान बनकर घूमने वाले
महेश कि शर्त फटी हुई हें आज,
वो पिट कर लौट रहा है या हवालात से !
.
बड़े भैया के एक बाजू से
महक रहा है जनाना इत्र,
उस लड़की का
जिसके हाथ थाम जनाब सिनेमा देख आये हें !
पिताजी का सिलवटो और पसीने से भरा शर्ट
हिसाब देता हें उन पैसो का,
जो हम बेफ़िक्री से उड़ाते हें !
माँ की साड़ी में गंध और कालिख हें कोयले की,
लगता हें गैस फिर खत्म हो गई है !
आज फिर रोटी खानी होगी चूल्हे की !
.
मेरे दोस्त के टी शर्ट में बू हें धुए की सी,
शायद कही गली में छुप कर वो सिगेरेट सुलगाता होगा !
दादाजी कि उस पुरानी धोती से एक अजीब गंध आती हें
शायद तजुर्बे कि महक होगी !
हर बिना धुले कपडे की एक कहानी होती हें!!
.
.
चौराहे पर बैठे उस बूढ़े भिखारी का फटा कुर्ता
दशको से नहीं धुला,
उसमे छुपी हें अनगिनत सच्चाइयाँ
और लाचारी भरे लम्हे कई,
पर मोटे उपन्यासों को पढ़ने का वक्त किसी के पास नहीं !
पहाड़ के उस पुराने मंदिर में
जहा अब कोई नहीं जाता
एक ध्वजा लहराती हें,
कहती हें कहानी उन दिनों कि
जब इंसा इतना नास्तिक न था !
हर बिना धुले कपडे की एक कहानी होती हें!!
.
.
अक्सर ये कहानिया वक्त बा वक्त धो दी जाती हें
एक नई इबारत लिखने को,
पर कुछ कहानियों को संजोया जाता हें सुनाने को !
जैसे कि मेरी अलमारी बड़े जतन से रखा वो रुमाल
जो फिरंगी मेम का चुराया था,
मानो महक आती हें उसमे परदेस की !
हाँ! और जैसे वो ‘मफलर’
जो भैया को उनकी सहेली ने दिया था शायद,
छूने भी नहीं देता किसी को
हर बिना धुले कपडे की एक कहानी होती हें
.
.
लेकिन अलमारी में बिलकुल पीछे,
एक फौजी वर्दी टंगी हें चचाजान की !
घर के बड़े कभी कभी अकेले में
उसे देख कर रो लिया करते हें !
उस वर्दी पर आखिरी कहानी के शायद कुछ ज़ख्म बचे है
अब उसकी सिलवटो में कोई नई कहानी नहीं भरता
क्योंकि उन हरी स्लेटी सतहो लिखने वाला
लंबी छुट्टियों पर गया हें !!
हर बिना धुले कपडे की एक कहानी होती हें

ऋषभ जैन 

9 comments:

  1. बहुत सी यादों को समेटे हुए ...अच्छी प्रस्तुति



    कमेंट्स कि सेटिंग से वर्ड वेरिफिकेशन हटा दें ...

    ReplyDelete
  2. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 14 - 9 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

    http://charchamanch.blogspot.com/

    coments ki setting se word verification hata len

    ReplyDelete
  3. रचना बहुत अच्छी लगी |बधाई
    आशा

    ReplyDelete
  4. @ sangeeta ji ... bahut bahut shukriya

    ReplyDelete
  5. पिताजी का सिलवटो और पसीने से भरा शर्ट
    हिसाब देता हें उन पैसो का,
    जो हम बेफ़िक्री से उड़ाते हें !
    माँ की साड़ी में गंध और कालिख हें कोयले की,
    लगता हें गैस फिर खत्म हो गई है !
    आज फिर रोटी खानी होगी चूल्हे की !

    Aur

    उस वर्दी पर आखिरी कहानी के शायद कुछ ज़ख्म बचे है
    अब उसकी सिलवटो में कोई नई कहानी नहीं भरता
    क्योंकि उन हरी स्लेटी सतहो लिखने वाला
    लंबी छुट्टियों पर गया हें !!
    हर बिना धुले कपडे की एक कहानी होती हें .

    kua khoob andaj hai aapka. Behatareen Pl verification hata den isse tippani karne walon ko preshani hoti hai.

    ReplyDelete
  6. बहुत ही उम्दा .. ऐसा लगता है की किसी दिन अपने कमरे में बैठे हुए .. सामने पड़ी हुई कमीज़ को ही देखकर ये लिखा डाला है.. सोच को नए आयाम देती हुई कविता के लिए बधाइयाँ ...

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  7. bahut hi acchi kavita likhi hai rishab

    specially i liked

    हर बिना धुले कपडे की एक कहानी होती हें !
    सिमटी हुई सी,
    कभी आस्तीन कभी जेब कभी महक में छुपी !
    झांकते है कुछ लम्हे कुछ यादे,
    उन सिलवटो और निशानों से !
    और सुनाते हें एक कहानी उस सफर की,
    जो उसके धुलने के साथ ही भुला दिया जाएगा !
    हर बिना धुले कपडे की एक कहानी होती हें !!
    .
    and

    दादाजी कि उस पुरानी धोती से एक अजीब गंध आती हें
    शायद तजुर्बे कि महक होगी

    ReplyDelete
  8. aap sabhi ka is chote se kavi ka utsaah vardhan karne ke liye bahut bahut shukriya !!

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  9. bahut hi badhiya...
    sabhi panktiya behtereen thi...'mujhe sabse jyada bhikhari wali achhi lagi...

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