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Thursday, September 26, 2013

मुलाकात

यूँ तो मिलने की अक्सर कोई वजह नहीं होती, 
पर इत्तफाकन यूँ मुलाकातें, बेवजह नहीं होती । 

तेरे ख्वाब में ही जागा हूँ बे-सबर मैं रात भर,
काश उजले ख़्वाबों में कभी शब् नहीं होती । 

करिश्मा-ए-कुदरत की कुछ सियासत रही होगी,
वरना पहली ही नज़र यूँ मोहब्बत नहीं होती । 

फासला है उम्र भर का और साथ तुम नहीं,
काश बेज़ार ऐसी ज़िन्दगी लम्बी नहीं होती ।

इश्क के बाज़ार में क्यों बैठा है तू 'आशिक',
 टूटे हुए टुकड़ों की यहाँ कीमत नहीं होती ।

ऋषभ 

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