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Tuesday, October 20, 2009

कवि तो ख़ुद एक कविता हे!


कवि तो ख़ुद एक कविता है


उसमें अनंत गहराई है,
है व्याकुलता, तन्हाई है,
ढूंढ सको तो ढूंढ लो ,
एकसोताउसमें कहीं बहता है-
कवि तो ख़ुद एक कविता है
दुनिया से बेगाना है,
दुनियादारी से अनजाना है,
अव्यक्त, उलझे भावों को,
वो कागज़ पर लिख देता है-
कवि तो ख़ुद एक कविता है
शब्दों की भी सीमायें हैं,
कविता में कुछ अंश ही आयें हैं,
सागर से निकली इन बूंदों में भी,
कितना कुछ वो कहता है ,
कवि तो ख़ुद एक कविता है
उन शब्दों को हम ना ताकें,
गर उस हलचल को पहचान सके
क्या कहना आख़िर वो चाहता है,
उन अर्थों को हम जान सकें,
बेचैनी, उमंग नीरवता को भी,
वो लफ्जों में कह देता है
कवि तो ख़ुद एक कविता है
कविता तो एक माध्यम है,
आख़िर तो कवि को पढ़ना है
कलम की इस सीढ़ी से,
उसके ह्रदय तक चढ़ना है
वहाँ पहुंचोगे तो पाओगे
एक कलकल करती सरिता है
कवि तो ख़ुद एक कविता है
ऋषभ जैन

9 comments:

  1. आप सौभाग्यशाली मित्रों का स्वागत करते हुए मैं बहुत ही गौरवान्वित हूँ कि आपने ब्लॉग जगत मेंपदार्पण किया है. आप ब्लॉग जगत को अपने सार्थक लेखन कार्य से आलोकित करेंगे. इसी आशा के साथ आपको बधाई.
    ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं,
    http://lalitdotcom.blogspot.com
    http://lalitvani.blogspot.com
    http://shilpkarkemukhse.blogspot.com
    http://ekloharki.blogspot.com
    http://adahakegoth.blogspot.com
    http://www.gurturgoth.com

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  2. हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं...........
    इधर से गुज़रा था, सोचा सलाम करता चलूं..

    http://www.samwaadghar.blogspot.com/

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  3. Sach hai..... neeraj ji ke shabdon mein

    तब मानव कवि बन जाता है !
    जब उसको संसार रुलाता,
    वह अपनों के समीप जाता,
    पर जब वे भी ठुकरा देते
    वह निज मन के सम्मुख आता,
    पर उसकी दुर्बलता पर जब मन भी उसका मुस्काता है !
    तब मानव कवि बन जाता है !

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  4. bahut sundar bhavpooran rachna ke liye bdhai
    lekin hai yeh rachna.. ise kasiye tab ye kavita hogi.. kavita shabd ki aatma hoti hai shabd ke moh se mukt hokar likhiye..

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  5. Ek din apne saamne
    saaf–sa ek aaina rakhna
    phir uske aks par kuch likhana

    koi aisi baat
    tum usmein kahna
    jismein sirf tum rahna

    apne har jazbaat ke saath…
    sab ujle-maile khwaab ke saath
    choo lene waaley ehsaas ke saath

    par jab bhi dhoomil ho jaaye…
    likhane mein khud ka dikhna
    tab kabhi nahin; tum kuch bhi likhna

    kyuonki zaroori hai
    apne likhe mein dikhate rahna
    aur khud ko dekhate huye likhate rahna

    tab hi
    khud ko achcha lagega
    aur duniya ko sachcha lagega.
    ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~
    …! … Subh Srijan! ... Rahe Anant!!…

    Neelesh Jain, Mumbai
    http://www.yoursaarathi.blogspot.com/

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  6. आपका लेख पड्कर अछ्छा लगा, हिन्दी ब्लागिंग में आपका हार्दिक स्वागत है, मेरे ब्लाग पर आपकी राय का स्वागत है, क्रपया आईये

    http://dilli6in.blogspot.com/

    मेरी शुभकामनाएं
    चारुल शुक्ल
    http://www.twitter.com/charulshukla

    ReplyDelete
  7. चिटठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. मेरी शुभकामनाएं.
    ---

    हिंदी ब्लोग्स में पहली बार Friends With Benefits - रिश्तों की एक नई तान (FWB) [बहस] [उल्टा तीर]

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