खोया हूँ ...

एक अटकी सांस,
कुछ उलझे अलफ़ाज़,
चंद उधार धड़कने,
मेरा कुछ भी तो नहीं मुझमे |

रे पगली,

तू मुझको मुझमें क्यों ढूंढ़ती है?
में तो खोया हूँ तुझमे | 

Comments

  1. कुछ साँसे लेने की कोशिश में चला
    तेरा आशिक दीवाना

    वादियों में, झरनों में,
    तेरे हुस्न के महलों में
    खोया हूँ
    उन हंसी के झालो में

    रे पगली,
    तू मुझको मुझमें क्यों ढूंढ़ती है?
    में तो खोया हूँ तुझमे |

    ReplyDelete

Post a Comment

Thank You :)

Popular posts from this blog

इस पर्युषण पर्व ना भेजे किसी को क्षमापना का व्हाट्सएप, लेकिन इन 4 को जरूर बोले मिलकर क्षमा

Mirza Ghalib Episode 1 (Doordarshan) Deciphered

एक चोमू था ...